समय चक्र

गुरुवार, 12 अप्रैल 2012

                      ऐसा ही तो होता है भाग्यवान जब मैके  जाती है!
चद्दर मैली..कमरे में सब चीजें फैली]
चाय बने जैसे तैसे तो जल जाये पतेली]
..........ऐसा ही तो होता है भाग्यवान जब मैके  जाती है!

अलार्म बजते रहते है]और हम सोते रह जाते है]
फिर पडोसी होकर परेशां हमको जगाते है]
देख घडी की बेरुखी हम दौड़ लगाते है]
...........
ऐसा ही तो होता है भाग्यवान जब मैके  जाती है!

शाम को घर जब आ जाते है]
रसोई में मिले  वो  खा जाते है]
फिर बाज़ार घुमने जाते है]
..........
ऐसा ही तो होता है भाग्यवान जब मैके  जाती है!

मिलता नहीं पायजामा है]
भूले सा-रे-गा-मा है]
हालात  खरामा खरामा है]
..........ऐसा ही तो होता है भाग्यवान जब मैके  जाती है!

शनिवार, 31 दिसंबर 2011


                   नया साल हमको ..
साल रहा है मलाल हमको ,
जा रहा है छोड़ गया साल हमको|
 
जो नहीं दे कर गया 'गया साल',
वो दिलाएगा नया साल हमको||

 

हर साल का एक इतिहास होता है.
कुछ अलग हर साल अहसास होता है.
किसी के लिए रीता रीत जाता है..और..
किसी के लिए खास होता है
..तो नया साल मिलेगा कमाल हमको||१||
 


ग्रह बदलेंगे -चाल बदलेगी.
कलेंडर के साथ दीवाल बदलेगी.
खड़े है हम कौम के नाजुक मुकाम पे.
हम बदलेंगे तो पूरा हाल बदलेगा
..तो दुनिया में करना है धमाल हमको||२||


शनिवार, 29 अक्तूबर 2011



                  कौन बनेगा करोडपति

     रोजाना की तरह जब होने लगी शाम
     तो टी वी पे आने लगा एक प्रोग्राम...
KBC -KBC यानि कौन बनेगा करोड़पति
जिसको देखते है..श्रीमान--श्रीमान के बच्चे और श्रीमती--
     सबकी आँखों में एक ही सपना
     ..कि..ये करोड़ का इनाम हो जाये अपना

हमारे पडोसी मिस्टर ग्वाला--
  जो कर चुके है एक घोटाला--
हमसे बोले -लाला!
  जो ये इनाम लग जाये करोड़ वाला--
तो बंगला बने एक उत्तरमुखी वाला--
  और बने हमारी जीवन संगिनी-युक्तामुखी बाला1॥

हमारे मोहल्ले के ही एक राजनेता--
 जिन्हें आजकल कोई नहीं सहता-- 

हमसे बोले -ये प्रोग्राम नहीं क्रांति है--
  अजी ये तूफ़ान के पहले की शांति है--

हमने अनजाने ही बहुत बड़ा काम किया है--
  सरस्वती को लक्ष्मी का स्थान दिया है2॥

     पर मित्रों! जो दिख पड़ती है..वही सच्चाई नहीं होती
     जुए से कभी किसी की भलाई नहीं होती
     

     धृतराष्ट्र की सभा में फिर परीक्षा की घडी है
     और जनता द्रौपदी से हॉट सीट पे खड़ी है

(ये रचना मैंने KBC १ के समय लिखी थी...कालांतर में भी इसकी प्रासंगिकता यथावत है)

शनिवार, 2 जुलाई 2011


                     जय दिल्ली वाली की....



क्या समझेंगे आप देश की इस उलटबांसी से !!
लटक गयी है दिल्ली वाली उसे बचाने फांसी से !!
जिसने कुत्सित हथकंडो से भारत को बर्बाद किया,
इटली वाली उसको पूजे सोने-चांदी-कांसी से !!

अफजल को फांसी का मुहूर्त जाने किस दिन आएगा !
और कसाब हमारी रोटियां अभी कितने दिन खायेगा!!
आतंकी सूबों के मन में फिर मयूरा नाचा है!
जेलों में गुंडों की खातिर अपने मुंह पे तमाचा है!!

दिल्ली वाले कुम्भकरणों की नींद खुलेगी किस पल में !
कब तक राजनीति देखेंगे हर समस्या के हल में!!
हिम्मत रख कर देश बचा लो शातिर हथकंडे से!!
लटका दो कातिलों को तत्क्षण फांसी के फंदे से!!

रविवार, 1 मई 2011


                                                           पिता क्या है ?

 मैं कवि बनके रवि पर लिख दूंगा, ये तो मेरी कीमत  है !
पर उन पिता पर क्या छंद लिखूंगा,जोकि मेरी हिम्मत है!!  
उन पिता के यशोगान को मेरी ये वाणी भोंटी है !
और लिखने को उनके कीर्तिमान को ये धरती भी छोटी है!!

 
 जिनकी अंगुली पकड़ के, मैंने जाना हर पगडण्डी को !
जिनकी शॉल के बूते ललकारा, मैंने भीषण ठंडी को !! जिनके अनुशासन से, हम वैभव के विस्तार हुए!
जिनकी आँखों के सपनो से, हम इस भांति साकार हुए !!

 

 जब से मैंने जग को जाना, वे ही तो परिचायक है!
वे ही सबल प्रेरक है, हीरो है,  मेरे नायक है!!

वे दूर हो तो भी लगता है- जैसे पास हो, यहीं-कहीं है!
पिता क्या है? ये उनसे पूछो जिनके सिर पे पिता नहीं है!!

बुधवार, 13 अप्रैल 2011

                                         
        थक जाओ तो हमें बुलाना.
           जीवन है हमको जीते जाना,रोना हँसना - हँसाना गाना !
           किसी मोड़ पे जो तुम प्यारे, थक जाओ तो हमें बुलाना!!

           यह जीवन है एक चढ़ती नसेनी,
          हर सीढ़ी एक नया साल है,
          सीढ़ी-सीढ़ी चढ़ते जाना,थक जाओ तो हमें बुलाना !!1!!

         यह जीवन उड़ता आसमान सा,
         हर साल एक गुब्बारा है,
         हर साल एक नया उड़ाना,थक जाओ तो हमें बुलाना !!2!!

         यह जीवन है राजपथों सा,
         हर साल एक मील का पत्थर,
         हर साल एक नया चल के जाना,थक जाओ तो हमें बुलाना!!3!!

शनिवार, 9 अप्रैल 2011

                                      अन्ना का अभिनन्दन है!

                                    आज फिर से हवा चली है,हवा नहीं ये आंधी है!
                                     अन्ना कोई नया नहीं है,वही पुराना गाँधी है!!
कुर्सी वाले कुकुरमुत्तों को, अन्ना ने जांचा है!
जनता का लोकपाल उनके, मुंह पे एक तमाचा है!!
अन्ना ने दिल्ली में जाकर, दिल्ली को ललकारा  है!
बता दिया है देश को दिल्ली कितनी  नाकारा है!!
दुनिया ने फिर भांप लिया है, भारत क्यों आबाद है!
शास्त्री जी के सोमवार की  हमको अब तक याद है!!
                                                                                 जनता नहीं अब बहलेगी, केवल आश्वासन से!
                                                                                 प्रमाण मांगे जायेंगे, तरक्की के, शासन से!!
                                                                                 उनका चेहरा डरा हुआ है, जो जीते है नोट से!
                                                                                 'मन्नू' भाई की मोटर चल रही रिमोट से!! 
रिमोट "मेड इन इटली' का पर सेल पड़ गए डाउन है! 
अन्ना ने उन्हें ललकारा, जिनके सर पे क्राउन है!! 
अन्ना करता अनशन जब, लगता मनमौजी है! 
आखिर उसके अन्दर वोही, सन बासठ वाला फौजी है!! 
अन्ना हजारे एक नही, अब गणना है  करोड़ पे ! 
घर बाहर बाज़ारों में, घूम रहा है रोड पे !! 
अन्ना का अनशन पूजा है,अन्ना का धरना वंदन है! 
ऐसे माटी के सपूत का ,पसीना भी चन्दन है!!
                                                 अन्ना का अभिनन्दन है!
                                                 अन्ना का अभिनन्दन है!!

सोमवार, 4 अप्रैल 2011

 
 वर दे ! वर दे!! वर दे!!!

एक दिन बोले भोगी जी!
 इक बात बताओ योगीजी !!
मेरे मन में जिज्ञासा है ,
समाधान की आशा है?
मैं बोला निसंकोच कहो
सोच के कहो बिनसोच कहो!!

ख़ुशी ख़ुशी भोगी बोले प्रश्नों के दागे गोले
बोले कि जल से पतला कौन है कौन भूमि से भारी
कौन आग से तेज है और कौन काजल से काली !!!

जल से पतला कौन है?
जी, माफिया का डोन है,
देश जिसका बंगला है
दिल्ली जिसका लॉन है,
जनपथ से राजपथ तक जिसका आना जाना ऑन है {अधिक अर्थ हेतु १० जनपथ और ०७ राजपथ पढ़े }
जल से पतला कौन है ?
जी,माफिया का डोन है !!

कौन भूमि से भारी है?
जी,आज कल कि नारी है,
घर में पति बेचारा है,
बाहर ये बेचारी है
३३ की अधिकारी है
वेट मशीन पे वेट करवालो ये सब पे भारी है
कौन भूमि से भारी है?
जी, आज कल की नारी है!!

गठबंधन सरकारों में
जो घूमता है कारों में
निर्दलीय जीत कर आता है
और मंत्री पद पा जाता है
ऐसे नेता का क्रेज है
यह आग से भी तेज है !!

हमारे नेता भालू से
कलमाड़ी और लालू से
सुखराम मुलायम चालू से
बने है चिकनी बालू से
सब के सब बंटाधारी है
पोलिटिक्स काजल से काली है!!

इतना सुनकर भोगीजी
जो थे हार्ट के रोगी जी
हार्ट पकड़ के बैठ गए
दर्द उठा तो लेट गए
फिर तो बड़ा दुर्योग हुआ
उनका हमसे वियोग हुआ
तब से बहुत मैं डरता हूँ
नित्य प्रार्थना करता हूँ
वर दे, वर दे , वर दे,
जनता को दिल देने वाले नेताओ को भी दिल का वर दे!
यदि नहीं तो हम सबके सीने में इक पत्थर धर दे!!वर दे वर दे वर दे!!!

रविवार, 27 मार्च 2011

       राजनीति के आप खिलाडी

चित भी मेरी पट भी मेरी ठेंगा मेरे बाप का!
राजनीति के आप खिलाडी क्या कहना है आपका!!

 
दलाली खाई,हलाली खाई,सदा कमी काली खाई,
लालटेन के उजियारे में cm  बन गए धणी लुगाई,
चार सो करोड़ का चारा चर गए,
अपना वारा न्यारा कर गए,नेता है कि जैसे कोई पुनर्जन्म जिराफ का!!१!!राजनीति के आप ...

राम पंथी वाम हुए है ,वाम पंथी विराम हुए है,
सुराज स्वदेशी तमाम हुए है, प्याज भाव में आम हुए है,
 सब के सब कुर्सी के टट्टू,
उसी के आशिक उसी पे लट्टू ,धन भी काला-मन भी काला,ज्यो इंजन हो भाप का!!२!!राजनीति के आप...

शुक्रवार, 25 मार्च 2011

फेसबुक के जनक : मार्क जकरबर्ग


नई पीढ़ी की नई हथाई है यह फेसबुक !
रोज साँझ जहाँ साझा होते सुख दुःख !!
झलक गर मिल जाती किसी की धोखे से!
हजारो यादें कूद निकलती यादों के झरोखे से!!
रोज नई request भेजते रोज मिलते है सन्देश!
notification उनके मिलते जो बैठे देश विदेश!!
धन्यवाद है फेसबुक पिताजी मार्क जकर्बर्ग!
नरक सी इस दुनिया में लाये आप एक स्वर्ग!!